Lalten wala
by
Va Ma
Comedy
Adults
गाँव का एक नौजवान, मोनू, अपनी रहस्यमयी लालटेन के साथ एक हास्यप्रद यात्रा शुरू करता है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि उसकी लालटेन एक अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण है, जो लोगों को डराने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Contents
10 words · 3 chapters · 1 characters
Chapter
01
लालटेन का रहस्य
मोनू ने अपने गाँव के छोटे से घर में दरवाजे पर टंगे पुराने कोट को हटाकर नई लालटेन को बड़े गर्व से देखा। यह कोई साधारण लालटेन नहीं थी; यह उसके दादाजी की विरासत थी, जो गाँव के किस्सों में हमेशा रहस्यमयी बताई जाती थी। मोनू को यह लालटेन कुछ दिनों पहले ही मिली थी, जब वह अपने घर के पुराने तख्ते के नीचे सफाई कर रहा था।
लालटेन का काँच चमचमा रहा था, और उसकी पीतल की बॉडी पर अजीबोगरीब नक़्शे बने हुए थे, जिन्हें देखकर मोनू को लगता था कि यह कोई जादुई वस्तु है। मोनू ने लालटेन के ऊपर हल्के से थपकी दी और उसे जलाने का प्रयास किया। जैसे ही उसने लालटेन की बत्ती जलाई, एक तेज़ चमक उसके चारों ओर फैल गई और घर की दीवारों पर अजीबो गरीब छायाएँ उभर आईं।
मोनू ने आँखें मिचमिचाई और खुद से मुस्कुराते हुए बोला, "वाह! ये तो सही में जादुई है।" वह तुरंत इसे लेकर गाँव की गलियों में निकल पड़ा, जहाँ उसे पता था कि लोग उसके इस नए अविष्कार को देखकर चौंक जाएँगे।
गाँव की गलियों में आते ही मोनू ने अपनी आवाज़ में थोड़ा डरावना अंदाज़ लाते हुए पुकारा, "देखो, देखो! लालटेन वाला आ गया है! जो डरना चाहे, वो मेरे पास आए!"
मोनू की आवाज़ सुनकर गाँव के कुछ बच्चे, जो पहले ही उसके मजाकिया अंदाज़ से परिचित थे, हंसने लगे। परंतु कुछ बुजुर्ग महिलाएँ और पुरुष, जो अंधविश्वास में यकीन करते थे, सचमुच लालटेन को देखकर सहम गए।
"अरे मोनू, ये क्या कर रहा है?" रमेश काका ने मुस्कुराते हुए पूछा, जो गाँव के सबसे समझदार व्यक्ति माने जाते थे।
"काका, ये कोई साधारण लालटेन नहीं है। ये जादू दिखाती है!" मोनू ने आँखें चौड़ी करते हुए कहा।
अब तक लोगों की भीड़ उसके चारों ओर जमा हो चुकी थी। मोनू ने लालटेन को ऊँचा उठाया और कहा, "जो लोग डरपोक हैं, वो पीछे हट जाएँ।"
लोगों ने डरते-डरते कदम पीछे खींच लिए। कुछ महिलाएँ तो अपने कानों को हाथों से ढककर वहां से चली गईं। मोनू ने अपनी हंसी छुपाते हुए लालटेन का बटन घुमाया, जिससे एक हल्की सी धुंध उत्पन्न हो गई। यह धुंध सचमुच अजीब थी, लेकिन मोनू के लिए यह बस एक साधारण धुआँ था, जिसे उसने लालटेन के साथ छेड़छाड़ करके प्राप्त किया था।
गाँव में चर्चा होने लगी कि मोनू की लालटेन सचमुच जादुई है। कुछ लोग तो यह तक कहने लगे कि यह लालटेन भूत-प्रेतों की बात करती है। मोनू ने इन अफवाहों को और बढ़ावा देने का निश्चय किया, क्योंकि उसे इस से बड़ा मजा आता था।
एक रात, जब गाँव के कुछ लोग एक साथ बैठकर कहानियाँ सुना रहे थे, मोनू अचानक उनके पास पहुँचा। उसकी लालटेन चमक रही थी, और उसकी आँखों में शरारत की चमक थी। "कहानी सुनने का समय हो गया है," वह बोला।
लोगों ने उसे घेर लिया। मोनू ने लालटेन को ऊँचा उठाया और धीरे-धीरे बोलना शुरू किया, "ये लालटेन सिर्फ रोशनी नहीं देती, ये डर भी देती है।"
लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई। मोनू ने लालटेन से हल्की सी धुंध निकाली और कहा, "इसे देखो, यह धुंध किसी की यादें लेकर आती है।"
लोगों ने आँखें फाड़कर देखा, लेकिन अंदर से मोनू की हंसी नहीं रुक रही थी। उसने आगे कहा, "अगर किसी ने कुछ गलत किया है, तो ये लालटेन उसकी यादें सबके सामने ला सकती है।"
अब लोग सचमुच डरने लगे थे। मोनू ने सोचा कि ये मज़ा तो आगे भी जारी रखना चाहिए। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि इस लालटेन में कुछ असली रहस्य भी छुपे हुए हैं, जो उसकी इस मजेदार यात्रा को एक नई दिशा देने वाले थे।
लालटेन का काँच चमचमा रहा था, और उसकी पीतल की बॉडी पर अजीबोगरीब नक़्शे बने हुए थे, जिन्हें देखकर मोनू को लगता था कि यह कोई जादुई वस्तु है। मोनू ने लालटेन के ऊपर हल्के से थपकी दी और उसे जलाने का प्रयास किया। जैसे ही उसने लालटेन की बत्ती जलाई, एक तेज़ चमक उसके चारों ओर फैल गई और घर की दीवारों पर अजीबो गरीब छायाएँ उभर आईं।
मोनू ने आँखें मिचमिचाई और खुद से मुस्कुराते हुए बोला, "वाह! ये तो सही में जादुई है।" वह तुरंत इसे लेकर गाँव की गलियों में निकल पड़ा, जहाँ उसे पता था कि लोग उसके इस नए अविष्कार को देखकर चौंक जाएँगे।
गाँव की गलियों में आते ही मोनू ने अपनी आवाज़ में थोड़ा डरावना अंदाज़ लाते हुए पुकारा, "देखो, देखो! लालटेन वाला आ गया है! जो डरना चाहे, वो मेरे पास आए!"
मोनू की आवाज़ सुनकर गाँव के कुछ बच्चे, जो पहले ही उसके मजाकिया अंदाज़ से परिचित थे, हंसने लगे। परंतु कुछ बुजुर्ग महिलाएँ और पुरुष, जो अंधविश्वास में यकीन करते थे, सचमुच लालटेन को देखकर सहम गए।
"अरे मोनू, ये क्या कर रहा है?" रमेश काका ने मुस्कुराते हुए पूछा, जो गाँव के सबसे समझदार व्यक्ति माने जाते थे।
"काका, ये कोई साधारण लालटेन नहीं है। ये जादू दिखाती है!" मोनू ने आँखें चौड़ी करते हुए कहा।
अब तक लोगों की भीड़ उसके चारों ओर जमा हो चुकी थी। मोनू ने लालटेन को ऊँचा उठाया और कहा, "जो लोग डरपोक हैं, वो पीछे हट जाएँ।"
लोगों ने डरते-डरते कदम पीछे खींच लिए। कुछ महिलाएँ तो अपने कानों को हाथों से ढककर वहां से चली गईं। मोनू ने अपनी हंसी छुपाते हुए लालटेन का बटन घुमाया, जिससे एक हल्की सी धुंध उत्पन्न हो गई। यह धुंध सचमुच अजीब थी, लेकिन मोनू के लिए यह बस एक साधारण धुआँ था, जिसे उसने लालटेन के साथ छेड़छाड़ करके प्राप्त किया था।
गाँव में चर्चा होने लगी कि मोनू की लालटेन सचमुच जादुई है। कुछ लोग तो यह तक कहने लगे कि यह लालटेन भूत-प्रेतों की बात करती है। मोनू ने इन अफवाहों को और बढ़ावा देने का निश्चय किया, क्योंकि उसे इस से बड़ा मजा आता था।
एक रात, जब गाँव के कुछ लोग एक साथ बैठकर कहानियाँ सुना रहे थे, मोनू अचानक उनके पास पहुँचा। उसकी लालटेन चमक रही थी, और उसकी आँखों में शरारत की चमक थी। "कहानी सुनने का समय हो गया है," वह बोला।
लोगों ने उसे घेर लिया। मोनू ने लालटेन को ऊँचा उठाया और धीरे-धीरे बोलना शुरू किया, "ये लालटेन सिर्फ रोशनी नहीं देती, ये डर भी देती है।"
लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई। मोनू ने लालटेन से हल्की सी धुंध निकाली और कहा, "इसे देखो, यह धुंध किसी की यादें लेकर आती है।"
लोगों ने आँखें फाड़कर देखा, लेकिन अंदर से मोनू की हंसी नहीं रुक रही थी। उसने आगे कहा, "अगर किसी ने कुछ गलत किया है, तो ये लालटेन उसकी यादें सबके सामने ला सकती है।"
अब लोग सचमुच डरने लगे थे। मोनू ने सोचा कि ये मज़ा तो आगे भी जारी रखना चाहिए। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि इस लालटेन में कुछ असली रहस्य भी छुपे हुए हैं, जो उसकी इस मजेदार यात्रा को एक नई दिशा देने वाले थे।
Chapter
02
गाँव वालों का खेल
गाँव के लोग मोनू की कहानियों से पूरी तरह से मोहित हो चुके थे। गाँव के चौराहे पर रोज़ रात को एक नया किस्सा सुनने के लिए लोग जमा हो जाते थे। मोनू की लालटेन अब पूरे गाँव में चर्चित हो गई थी। उसकी कहानियाँ लोगों के दिलों में डर के साथ-साथ हंसी भी जगाती थीं।
एक रात, जब मोनू अपनी लालटेन के साथ चौराहे पर पहुँचा, तो वहाँ पहले से ही उत्सुकता का माहौल था। बुढ़ा रामू चाचा, जो हमेशा सबसे आगे बैठता था, बोला, "अरे मोनू, आज कौन सी कहानी लेकर आया है तू?"
मोनू ने अपनी लालटेन को घुमाते हुए जवाब दिया, "आज की कहानी थोड़ी अलग है। ये कहानी उन लोगों के लिए है जो अपने सपने भूल जाते हैं।"
लोगों ने ध्यान से सुनना शुरू किया। मोनू ने लालटेन को धीरे-धीरे घुमाया। लालटेन की रोशनी में हल्की सी धुंध फैलने लगी। लोगों के चेहरों पर कौतुहल था। मोनू ने कहा, "कहते हैं कि इस धुंध में आपके भूले हुए सपनों की गूंज छुपी होती है।"
तभी पप्पू, जो गाँव का सबसे शरारती लड़का था, चिल्लाया, "मोनू भैया, मेरे सपने तो हमेशा उड़ने के होते हैं। क्या ये लालटेन मुझे उड़ना सिखा सकती है?"
मोनू ने हंसते हुए जवाब दिया, "अरे पप्पू, अगर ये लालटेन तुझे उड़ना सिखा दे, तो तू गाँव का पहला इंसान होगा जो बिना पंख के उड़ सकेगा।"
सभी लोग हँस पड़े। मोनू की कहानियाँ अब केवल डर की बात नहीं रह गई थी, बल्कि इन कहानियों में लोगों के सपनों और इच्छाओं का भी अक्स दिखता था।
लेकिन इस सब के बीच, मोनू को अपनी लालटेन के असली रहस्य का पता नहीं था। एक रात, जब वह घर लौट रहा था, लालटेन अचानक से तेज़ी से चमकने लगी। मोनू ने देखा कि लालटेन से एक छोटी सी चिप निकलकर गिर पड़ी। उसने उसे उठाया और देखा कि उस पर कुछ लिखा हुआ था। उसे समझ नहीं आया कि यह क्या है, लेकिन उसने उसे अपनी जेब में रख लिया।
अगले दिन, मोनू ने अपने दोस्त राजू को दिखाया। राजू, जो हमेशा तकनीकी चीजों में रुचि रखता था, ने चिप को ध्यान से देखा। "मोनू, ये तो कोई इलेक्ट्रॉनिक चिप लगती है। लेकिन ये यहाँ क्या कर रही है?"
मोनू ने कंधे उचकाते हुए कहा, "मुझे नहीं पता, लेकिन लगता है कि इस लालटेन में कुछ असली जादू है।"
राजू ने सुझाव दिया, "क्यों न इसे शहर के किसी एक्सपर्ट को दिखाएँ? हो सकता है कि वो हमें इसके बारे में कुछ बता सके।"
मोनू को यह विचार पसंद आया। उसने तय किया कि अगले हफ्ते जब वह शहर जाएगा, तो इस चिप को दिखाकर इसके रहस्य को सुलझाएगा। लेकिन उसे यह भी पता था कि अगर यह सब सच निकला, तो उसकी मजेदार यात्रा एक नई दिशा ले सकती है।
उसने राजू से कहा, "तब तक, हम गाँव वालों को और कहानियाँ सुनाते हैं। इस लालटेन का मजा तो अभी शुरू हुआ है।"
राजू ने हंसते हुए सहमति में सिर हिलाया। मोनू और राजू ने मिलकर लालटेन की कहानियों को और भी रोचक बनाने का मन बना लिया। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह लालटेन उनकी सोच से भी ज्यादा अद्भुत और रहस्यमयी थी।
इस बीच, गाँव वाले मोनू की कहानियों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। हर कोई जानना चाहता था कि अगली बार मोनू की लालटेन से कौन सा नया रहस्य उजागर होगा।
अगली रात मोनू ने लालटेन उठाई और चौराहे की ओर बढ़ा। उसकी आँखों में एक नई चमक थी और दिल में एक नया जोश। लेकिन इस बार उसके मन में एक सवाल भी था – क्या वाकई इस लालटेन में कुछ ऐसा है जो किसी ने सोचा नहीं था?
कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह जानने के लिए सभी उत्सुक थे, और मोनू भी। शायद अगली रात कुछ नया खुलासा होगा। शायद यह लालटेन वाकई में कुछ ऐसा छुपा रही थी, जो सबके होश उड़ा देगा।
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एक रात, जब मोनू अपनी लालटेन के साथ चौराहे पर पहुँचा, तो वहाँ पहले से ही उत्सुकता का माहौल था। बुढ़ा रामू चाचा, जो हमेशा सबसे आगे बैठता था, बोला, "अरे मोनू, आज कौन सी कहानी लेकर आया है तू?"
मोनू ने अपनी लालटेन को घुमाते हुए जवाब दिया, "आज की कहानी थोड़ी अलग है। ये कहानी उन लोगों के लिए है जो अपने सपने भूल जाते हैं।"
लोगों ने ध्यान से सुनना शुरू किया। मोनू ने लालटेन को धीरे-धीरे घुमाया। लालटेन की रोशनी में हल्की सी धुंध फैलने लगी। लोगों के चेहरों पर कौतुहल था। मोनू ने कहा, "कहते हैं कि इस धुंध में आपके भूले हुए सपनों की गूंज छुपी होती है।"
तभी पप्पू, जो गाँव का सबसे शरारती लड़का था, चिल्लाया, "मोनू भैया, मेरे सपने तो हमेशा उड़ने के होते हैं। क्या ये लालटेन मुझे उड़ना सिखा सकती है?"
मोनू ने हंसते हुए जवाब दिया, "अरे पप्पू, अगर ये लालटेन तुझे उड़ना सिखा दे, तो तू गाँव का पहला इंसान होगा जो बिना पंख के उड़ सकेगा।"
सभी लोग हँस पड़े। मोनू की कहानियाँ अब केवल डर की बात नहीं रह गई थी, बल्कि इन कहानियों में लोगों के सपनों और इच्छाओं का भी अक्स दिखता था।
लेकिन इस सब के बीच, मोनू को अपनी लालटेन के असली रहस्य का पता नहीं था। एक रात, जब वह घर लौट रहा था, लालटेन अचानक से तेज़ी से चमकने लगी। मोनू ने देखा कि लालटेन से एक छोटी सी चिप निकलकर गिर पड़ी। उसने उसे उठाया और देखा कि उस पर कुछ लिखा हुआ था। उसे समझ नहीं आया कि यह क्या है, लेकिन उसने उसे अपनी जेब में रख लिया।
अगले दिन, मोनू ने अपने दोस्त राजू को दिखाया। राजू, जो हमेशा तकनीकी चीजों में रुचि रखता था, ने चिप को ध्यान से देखा। "मोनू, ये तो कोई इलेक्ट्रॉनिक चिप लगती है। लेकिन ये यहाँ क्या कर रही है?"
मोनू ने कंधे उचकाते हुए कहा, "मुझे नहीं पता, लेकिन लगता है कि इस लालटेन में कुछ असली जादू है।"
राजू ने सुझाव दिया, "क्यों न इसे शहर के किसी एक्सपर्ट को दिखाएँ? हो सकता है कि वो हमें इसके बारे में कुछ बता सके।"
मोनू को यह विचार पसंद आया। उसने तय किया कि अगले हफ्ते जब वह शहर जाएगा, तो इस चिप को दिखाकर इसके रहस्य को सुलझाएगा। लेकिन उसे यह भी पता था कि अगर यह सब सच निकला, तो उसकी मजेदार यात्रा एक नई दिशा ले सकती है।
उसने राजू से कहा, "तब तक, हम गाँव वालों को और कहानियाँ सुनाते हैं। इस लालटेन का मजा तो अभी शुरू हुआ है।"
राजू ने हंसते हुए सहमति में सिर हिलाया। मोनू और राजू ने मिलकर लालटेन की कहानियों को और भी रोचक बनाने का मन बना लिया। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह लालटेन उनकी सोच से भी ज्यादा अद्भुत और रहस्यमयी थी।
इस बीच, गाँव वाले मोनू की कहानियों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। हर कोई जानना चाहता था कि अगली बार मोनू की लालटेन से कौन सा नया रहस्य उजागर होगा।
अगली रात मोनू ने लालटेन उठाई और चौराहे की ओर बढ़ा। उसकी आँखों में एक नई चमक थी और दिल में एक नया जोश। लेकिन इस बार उसके मन में एक सवाल भी था – क्या वाकई इस लालटेन में कुछ ऐसा है जो किसी ने सोचा नहीं था?
कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह जानने के लिए सभी उत्सुक थे, और मोनू भी। शायद अगली रात कुछ नया खुलासा होगा। शायद यह लालटेन वाकई में कुछ ऐसा छुपा रही थी, जो सबके होश उड़ा देगा।
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Chapter
03
वास्तविक रहस्य का अनावरण
अगली रात मोनू ने जब लालटेन को जलाया, तो उसकी रोशनी में एक अजीब सी चमक थी। गाँव के चौराहे पर इकट्ठा हुए लोग उसकी कहानियों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। मोनू ने लालटेन को ऊँचा उठाया और शुरू किया, "आज की रात कुछ खास है। आज मैं तुम्हें एक ऐसी कहानी सुनाऊंगा, जो तुमने पहले कभी नहीं सुनी होगी।"
राजू, जो हमेशा मोनू के साथ होता था, उसके बगल में खड़ा था। उसने धीरे से मोनू के कान में फुसफुसाया, "क्या तुम वाकई कुछ नया बताने वाले हो, या फिर वही डरावनी कहानियाँ?"
मोनू ने अपनी मुस्कान छुपाते हुए कहा, "देखो, राजू, इस बार लालटेन खुद अपनी कहानी सुनाएगी।"
गाँव वाले उत्सुकता से मोनू की ओर देखने लगे। मोनू ने एक गहरी सांस ली और कहानी शुरू की, "बहुत समय पहले, इसी गाँव में एक रहस्यमयी लालटेन थी, जो रात में चमकती थी और लोगों को डराती थी। कहते हैं कि वह लालटेन एक अदृश्य शक्ति थी, जो केवल उन लोगों को दिखती थी, जिनके दिल में सच्चाई होती थी।"
जैसे-जैसे मोनू कहानी को आगे बढ़ा रहा था, लालटेन की रोशनी और भी तेज़ होती जा रही थी। एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे लालटेन के भीतर कुछ हलचल हो रही हो। लोग धीरे-धीरे डर और उत्सुकता के मिश्रण में लालटेन की ओर देखने लगे।
तभी अचानक, लालटेन ने एक हल्की सी ध्वनि की और मोनू का ध्यान उस पर गया। उसने देखा कि लालटेन के भीतर एक छोटी सी स्क्रीन उभर आई थी, जिस पर कोई संदेश लिखा था। मोनू ने करीब जाकर पढ़ने की कोशिश की, लेकिन संदेश समझ में नहीं आया।
राजू ने उत्सुकता से पूछा, "क्या लिखा है, मोनू?"
मोनू ने सिर हिलाते हुए कहा, "ये तो कोई अजीब भाषा में लिखा है। शायद ये वही रहस्य है, जिसे हम ढूंढ रहे हैं।"
गाँव वाले धीरे-धीरे मोनू और राजू के करीब आने लगे। उनके चेहरों पर उत्सुकता साफ झलक रही थी। मोनू ने सबको शांत करते हुए कहा, "लगता है इस लालटेन में कुछ खास छुपा है, जिसे हमें समझना होगा।"
राजू ने सुझाव दिया, "क्यों न हम इसे गाँव के पंडित जी को दिखाएँ? हो सकता है वह इसे समझ सकें।"
मोनू को सुझाव पसंद आया। उसने लालटेन को संभालते हुए कहा, "ठीक है, कल सुबह हम पंडित जी के पास चलेंगे। लेकिन तब तक, कोई भी इस बारे में बात नहीं करेगा।"
गाँव वाले सहमत हो गए और धीरे-धीरे अपने-अपने घर लौटने लगे। मोनू और राजू ने लालटेन को ध्यान से देखा। मोनू के मन में अब भी सवाल थे – यह लालटेन वाकई क्या थी, और यह अजीब स्क्रीन क्यों उभरी थी?
रात के अंधेरे में मोनू और राजू ने लालटेन को लेकर अपने घर की ओर कदम बढ़ाए। उनके दिलों में एक नई खोज की उत्सुकता थी। लालटेन की रोशनी में एक नई राह खुल रही थी, जो शायद उन्हें एक नया सच दिखाने वाली थी।
लेकिन क्या यह सच वाकई में वैसा होगा, जैसा उन्होंने सोचा था? या फिर यह एक और मजेदार मोड़ ले लेगा? अगला दिन उनके लिए क्या नया रहस्य लेकर आएगा?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए मोनू और राजू दोनों ही बेचैन थे। शायद यह लालटेन उनके जीवन में एक यादगार मोड़ ला सकती थी।
राजू, जो हमेशा मोनू के साथ होता था, उसके बगल में खड़ा था। उसने धीरे से मोनू के कान में फुसफुसाया, "क्या तुम वाकई कुछ नया बताने वाले हो, या फिर वही डरावनी कहानियाँ?"
मोनू ने अपनी मुस्कान छुपाते हुए कहा, "देखो, राजू, इस बार लालटेन खुद अपनी कहानी सुनाएगी।"
गाँव वाले उत्सुकता से मोनू की ओर देखने लगे। मोनू ने एक गहरी सांस ली और कहानी शुरू की, "बहुत समय पहले, इसी गाँव में एक रहस्यमयी लालटेन थी, जो रात में चमकती थी और लोगों को डराती थी। कहते हैं कि वह लालटेन एक अदृश्य शक्ति थी, जो केवल उन लोगों को दिखती थी, जिनके दिल में सच्चाई होती थी।"
जैसे-जैसे मोनू कहानी को आगे बढ़ा रहा था, लालटेन की रोशनी और भी तेज़ होती जा रही थी। एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे लालटेन के भीतर कुछ हलचल हो रही हो। लोग धीरे-धीरे डर और उत्सुकता के मिश्रण में लालटेन की ओर देखने लगे।
तभी अचानक, लालटेन ने एक हल्की सी ध्वनि की और मोनू का ध्यान उस पर गया। उसने देखा कि लालटेन के भीतर एक छोटी सी स्क्रीन उभर आई थी, जिस पर कोई संदेश लिखा था। मोनू ने करीब जाकर पढ़ने की कोशिश की, लेकिन संदेश समझ में नहीं आया।
राजू ने उत्सुकता से पूछा, "क्या लिखा है, मोनू?"
मोनू ने सिर हिलाते हुए कहा, "ये तो कोई अजीब भाषा में लिखा है। शायद ये वही रहस्य है, जिसे हम ढूंढ रहे हैं।"
गाँव वाले धीरे-धीरे मोनू और राजू के करीब आने लगे। उनके चेहरों पर उत्सुकता साफ झलक रही थी। मोनू ने सबको शांत करते हुए कहा, "लगता है इस लालटेन में कुछ खास छुपा है, जिसे हमें समझना होगा।"
राजू ने सुझाव दिया, "क्यों न हम इसे गाँव के पंडित जी को दिखाएँ? हो सकता है वह इसे समझ सकें।"
मोनू को सुझाव पसंद आया। उसने लालटेन को संभालते हुए कहा, "ठीक है, कल सुबह हम पंडित जी के पास चलेंगे। लेकिन तब तक, कोई भी इस बारे में बात नहीं करेगा।"
गाँव वाले सहमत हो गए और धीरे-धीरे अपने-अपने घर लौटने लगे। मोनू और राजू ने लालटेन को ध्यान से देखा। मोनू के मन में अब भी सवाल थे – यह लालटेन वाकई क्या थी, और यह अजीब स्क्रीन क्यों उभरी थी?
रात के अंधेरे में मोनू और राजू ने लालटेन को लेकर अपने घर की ओर कदम बढ़ाए। उनके दिलों में एक नई खोज की उत्सुकता थी। लालटेन की रोशनी में एक नई राह खुल रही थी, जो शायद उन्हें एक नया सच दिखाने वाली थी।
लेकिन क्या यह सच वाकई में वैसा होगा, जैसा उन्होंने सोचा था? या फिर यह एक और मजेदार मोड़ ले लेगा? अगला दिन उनके लिए क्या नया रहस्य लेकर आएगा?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए मोनू और राजू दोनों ही बेचैन थे। शायद यह लालटेन उनके जीवन में एक यादगार मोड़ ला सकती थी।
Cast of Characters
Monu
ProtagonistLalten wala horror
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The End
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by Va Ma
10 words · 3 chapters · 1 characters
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