जंगल का राजा शेर शेर
by
ran singh
Comedy
Kids
कहानी जंगल में रहने वाले जानवरों पर आधारित है। शेर शेर खुद को जंगल का राजा मानता है। जब वह शहर जाता है, तो उसे कई मजेदार और हास्यास्पद स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
Contents
21 words · 5 chapters · 1 characters
Chapter
01
जंगल की शान
जंगल के घने पेड़ों के बीच, एक विशाल और गजब का शेर रहता था। उसका नाम था शेर शेर। शेर शेर खुद को जंगल का राजा मानता था और हमेशा अपनी शान में घूमता रहता था। उसकी बड़ी-बड़ी मूंछें और सुनहरी फर सभी जानवरों को प्रभावित करती थीं।
एक दिन, जब शेर शेर अपने राजसी सिंहासन पर बैठा था, उसके पास एक तोता उड़ता हुआ आया। तोता बोला, "शेर शेर, मैंने सुना है कि शहर में एक बहुत बड़ा मेला लगा है। वहां बहुत मजेदार चीजें होती हैं।"
शेर शेर की आँखें चमक उठीं। वह बोला, "वाह, मेला! मैं भी देखना चाहता हूँ कि शहर कितना अजीब और मजेदार होता है।"
तोता ने कहा, "अगर आपको जाना है तो जल्दी चलिए, मेला कल ही खत्म हो जाएगा।"
शेर शेर ने तुरंत फैसला किया कि वह शहर जाएगा और वहाँ की मजेदार चीजें देखेगा। उसने अपने दोस्तों को बुलाया और कहा, "दोस्तों, मैं शहर जा रहा हूँ। आप सब मेरी अनुपस्थिति में जंगल का ध्यान रखना।"
बंदर, जो हमेशा हंसमुख और चंचल रहता था, बोला, "शेर शेर, आप चिंता मत करें। हम सब मिलकर जंगल की सुरक्षा करेंगे।"
शेर शेर ने अपनी पीठ पर एक छोटी सी थैली बांधी और खुशी-खुशी शहर की ओर चल पड़ा। उसकी चाल में एक अलग ही जोश था। रास्ते में उसे तरह-तरह के जानवर मिले, जो उसे देखकर मुस्कुराते और कहते, "जंगल का राजा शहर जा रहा है!"
शेर शेर ने गर्व से अपना सिर ऊँचा किया और आगे बढ़ता रहा। जब वह शहर पहुँचा, तो उसकी आँखें आश्चर्य से खुली की खुली रह गईं। वहाँ ऊँचे-ऊँचे इमारतें, रंग-बिरंगी रोशनी, और बहुत सारे लोग थे।
वह चकित होकर सोचने लगा, "ये शहर कितना बड़ा और चमकदार है! मुझे यहाँ की हर चीज देखनी है।"
शेर शेर मेले में घूमने लगा, और वहाँ उसे कई मजेदार चीजें दिखीं - झूले, खिलौने, और तरह-तरह के खेल। लेकिन जब वह एक बड़ी सी दुकान में गया, तो वहाँ के दुकानदार ने उसे देखकर कहा, "ओहो! ये तो असली शेर है!"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, मैं जंगल का राजा हूँ।"
दुकानदार हंसकर बोला, "राजा साहब, आपका स्वागत है। आप यहाँ क्या देखना चाहेंगे?"
शेर शेर ने सोचा और कहा, "मुझे वो रंग-बिरंगे गुब्बारे चाहिए।"
दुकानदार ने उसे गुब्बारे दिए और शेर शेर खुशी से उछल पड़ा। वह गुब्बारे लेकर मेले में घूमता रहा, और उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी।
लेकिन तभी, अचानक एक गुब्बारा फूट गया और शेर शेर डर के मारे उछल पड़ा। उसके चेहरे पर हैरानी और हँसी का अद्भुत मिश्रण था। वह सोचने लगा, "शहर तो सच में बड़ा मजेदार है!"
अब, शेर शेर को यह समझ में आया कि शहर में और भी कई मजेदार चीजें होने वाली हैं। वह तैयार था और उसकी आँखों में एक नई चमक थी। क्या शेर शेर और मजेदार स्थितियों का सामना करेगा? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
एक दिन, जब शेर शेर अपने राजसी सिंहासन पर बैठा था, उसके पास एक तोता उड़ता हुआ आया। तोता बोला, "शेर शेर, मैंने सुना है कि शहर में एक बहुत बड़ा मेला लगा है। वहां बहुत मजेदार चीजें होती हैं।"
शेर शेर की आँखें चमक उठीं। वह बोला, "वाह, मेला! मैं भी देखना चाहता हूँ कि शहर कितना अजीब और मजेदार होता है।"
तोता ने कहा, "अगर आपको जाना है तो जल्दी चलिए, मेला कल ही खत्म हो जाएगा।"
शेर शेर ने तुरंत फैसला किया कि वह शहर जाएगा और वहाँ की मजेदार चीजें देखेगा। उसने अपने दोस्तों को बुलाया और कहा, "दोस्तों, मैं शहर जा रहा हूँ। आप सब मेरी अनुपस्थिति में जंगल का ध्यान रखना।"
बंदर, जो हमेशा हंसमुख और चंचल रहता था, बोला, "शेर शेर, आप चिंता मत करें। हम सब मिलकर जंगल की सुरक्षा करेंगे।"
शेर शेर ने अपनी पीठ पर एक छोटी सी थैली बांधी और खुशी-खुशी शहर की ओर चल पड़ा। उसकी चाल में एक अलग ही जोश था। रास्ते में उसे तरह-तरह के जानवर मिले, जो उसे देखकर मुस्कुराते और कहते, "जंगल का राजा शहर जा रहा है!"
शेर शेर ने गर्व से अपना सिर ऊँचा किया और आगे बढ़ता रहा। जब वह शहर पहुँचा, तो उसकी आँखें आश्चर्य से खुली की खुली रह गईं। वहाँ ऊँचे-ऊँचे इमारतें, रंग-बिरंगी रोशनी, और बहुत सारे लोग थे।
वह चकित होकर सोचने लगा, "ये शहर कितना बड़ा और चमकदार है! मुझे यहाँ की हर चीज देखनी है।"
शेर शेर मेले में घूमने लगा, और वहाँ उसे कई मजेदार चीजें दिखीं - झूले, खिलौने, और तरह-तरह के खेल। लेकिन जब वह एक बड़ी सी दुकान में गया, तो वहाँ के दुकानदार ने उसे देखकर कहा, "ओहो! ये तो असली शेर है!"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, मैं जंगल का राजा हूँ।"
दुकानदार हंसकर बोला, "राजा साहब, आपका स्वागत है। आप यहाँ क्या देखना चाहेंगे?"
शेर शेर ने सोचा और कहा, "मुझे वो रंग-बिरंगे गुब्बारे चाहिए।"
दुकानदार ने उसे गुब्बारे दिए और शेर शेर खुशी से उछल पड़ा। वह गुब्बारे लेकर मेले में घूमता रहा, और उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी।
लेकिन तभी, अचानक एक गुब्बारा फूट गया और शेर शेर डर के मारे उछल पड़ा। उसके चेहरे पर हैरानी और हँसी का अद्भुत मिश्रण था। वह सोचने लगा, "शहर तो सच में बड़ा मजेदार है!"
अब, शेर शेर को यह समझ में आया कि शहर में और भी कई मजेदार चीजें होने वाली हैं। वह तैयार था और उसकी आँखों में एक नई चमक थी। क्या शेर शेर और मजेदार स्थितियों का सामना करेगा? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
Chapter
02
शहर की चकाचौंध
शेर शेर ने मेले में घूमते-घूमते अचानक एक बड़ा सा चक्कर लगाने वाला झूला देखा। वह चकित होकर बोला, "वाह! ये तो आसमान तक जाता है!" उसके भीतर का रोमांच उमड़ पड़ा। उसने झूले वाले भैया से कहा, "भैया, मुझे भी इस पर बैठना है।"
झूले वाले भैया ने मुस्कुराते हुए कहा, "राजा साहब, चढ़ जाइए। ये झूला आपको आसमान की सैर कराएगा।"
शेर शेर झूले पर चढ़ गया और झूला चलने लगा। झूला जब ऊपर की ओर गया, तो शेर शेर ने नीचे देखा और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। उसने सोचा, "ऊँचाई से तो सारा मेला एकदम छोटा लग रहा है! ये तो बड़ा मजेदार है।"
जैसे ही झूला नीचे आने लगा, शेर शेर ने खुशी में गाना गाना शुरू कर दिया। "मैं हूँ जंगल का राजा, मैं हूँ जंगल का राजा!" उसकी आवाज़ में एक अलग ही खुशी थी।
झूले से उतरने के बाद शेर शेर को सामने एक चाट की दुकान दिखी। उसकी नाक में चटपटे मसालों की खुशबू आई। वह जल्दी से दुकान के पास गया और बोला, "भैया, ये क्या है?"
चाट वाले भैया ने हंसकर कहा, "राजा साहब, ये चाट है। इसे खाकर तो हर कोई खुश हो जाता है।"
शेर शेर ने एक प्लेट चाट ली और चटकारे लेकर खाने लगा। "वाह! ये तो बड़ा स्वादिष्ट है!" उसने कहा।
तभी, उसे कुछ दूरी पर एक बड़ा सा गुब्बारा दिखाई दिया। वह गुब्बारा हवा में उड़ रहा था और उसके साथ एक छोटा बच्चा दौड़ रहा था। शेर शेर ने उस बच्चे की ओर देखा और बोला, "तुम्हारा गुब्बारा कितना सुंदर है!"
बच्चा हंसते हुए बोला, "धन्यवाद, शेर जी! आप भी मेरे साथ खेलिए।"
शेर शेर ने खुशी-खुशी उस बच्चे के साथ गुब्बारे के पीछे दौड़ लगाई। वह खुशी से उछल-कूद करने लगा और उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी।
शाम होते-होते शेर शेर ने सोचा, "शहर की चकाचौंध में तो बड़ी मजेदार चीजें होती हैं। लेकिन अब मुझे वापस जंगल भी लौटना है।"
लेकिन क्या शेर शेर शहर की और मजेदार चीजें देखने का मौका छोड़ेगा? या क्या उसे शहर में और भी मजेदार दोस्त मिलेंगे? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
झूले वाले भैया ने मुस्कुराते हुए कहा, "राजा साहब, चढ़ जाइए। ये झूला आपको आसमान की सैर कराएगा।"
शेर शेर झूले पर चढ़ गया और झूला चलने लगा। झूला जब ऊपर की ओर गया, तो शेर शेर ने नीचे देखा और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। उसने सोचा, "ऊँचाई से तो सारा मेला एकदम छोटा लग रहा है! ये तो बड़ा मजेदार है।"
जैसे ही झूला नीचे आने लगा, शेर शेर ने खुशी में गाना गाना शुरू कर दिया। "मैं हूँ जंगल का राजा, मैं हूँ जंगल का राजा!" उसकी आवाज़ में एक अलग ही खुशी थी।
झूले से उतरने के बाद शेर शेर को सामने एक चाट की दुकान दिखी। उसकी नाक में चटपटे मसालों की खुशबू आई। वह जल्दी से दुकान के पास गया और बोला, "भैया, ये क्या है?"
चाट वाले भैया ने हंसकर कहा, "राजा साहब, ये चाट है। इसे खाकर तो हर कोई खुश हो जाता है।"
शेर शेर ने एक प्लेट चाट ली और चटकारे लेकर खाने लगा। "वाह! ये तो बड़ा स्वादिष्ट है!" उसने कहा।
तभी, उसे कुछ दूरी पर एक बड़ा सा गुब्बारा दिखाई दिया। वह गुब्बारा हवा में उड़ रहा था और उसके साथ एक छोटा बच्चा दौड़ रहा था। शेर शेर ने उस बच्चे की ओर देखा और बोला, "तुम्हारा गुब्बारा कितना सुंदर है!"
बच्चा हंसते हुए बोला, "धन्यवाद, शेर जी! आप भी मेरे साथ खेलिए।"
शेर शेर ने खुशी-खुशी उस बच्चे के साथ गुब्बारे के पीछे दौड़ लगाई। वह खुशी से उछल-कूद करने लगा और उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी।
शाम होते-होते शेर शेर ने सोचा, "शहर की चकाचौंध में तो बड़ी मजेदार चीजें होती हैं। लेकिन अब मुझे वापस जंगल भी लौटना है।"
लेकिन क्या शेर शेर शहर की और मजेदार चीजें देखने का मौका छोड़ेगा? या क्या उसे शहर में और भी मजेदार दोस्त मिलेंगे? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
Chapter
03
शेर की शरारतें
शेर शेर ने जंगल लौटने का निर्णय तो कर लिया था, लेकिन उसकी शरारती प्रवृत्ति ने उसे शहर में थोड़ा और रुकने पर मजबूर कर दिया। उसने सोचा, "चलो, थोड़ी और मस्ती कर ली जाए।"
शेर शेर ने देखा कि पास ही एक बड़ा सा पार्क है। वहां बच्चों की भीड़ थी। कुछ बच्चे झूले में झूल रहे थे, तो कुछ गेंद खेल रहे थे। शेर शेर ने सोचा, "यह तो मजेदार जगह है। मुझे भी खेलना चाहिए।"
वह पार्क में गया और देखा कि एक झूला खाली है। उसने झूला देखा और उसके पास पहुंचा। तब तक एक बच्चा वहां आ गया और बोला, "शेर जी, आप झूला झूलेंगे?"
शेर शेर हंसकर बोला, "हाँ, क्यों नहीं! मेरे जैसे राजा को भी तो मस्ती करनी चाहिए।"
शेर शेर झूले पर बैठा और धीरे-धीरे झूलने लगा। लेकिन उसकी भारी काया के कारण झूला तेजी से ऊपर-नीचे होने लगा। बच्चे हंसने लगे और शेर शेर भी हंसते हुए बोला, "अरे, ये तो बड़ा मजेदार है!"
तभी, एक पतंग उड़ाने वाला बच्चा उसके पास आया और बोला, "शेर जी, आप पतंग उड़ाना जानते हैं?"
शेर शेर ने उत्साहित होकर कहा, "नहीं, लेकिन मैं सीख सकता हूँ।"
बच्चे ने उसे पतंग की डोर पकड़ाई और शेर शेर ने पतंग उड़ाने की कोशिश की। पतंग कभी ऊपर जाती, कभी नीचे। बच्चे हंसते हुए बोले, "शेर जी, आप तो बहुत अच्छे पतंगबाज़ बन गए हैं!"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं तो हर काम में अच्छा हूँ।"
शाम हो चुकी थी और शेर शेर ने देखा कि पार्क की लाइट्स जल गईं। उसने सोचा, "अब मुझे सच में जंगल लौटना चाहिए।" लेकिन तभी उसे एक और मस्ती भरा ख्याल आया। उसने पार्क के बीचोबीच एक ऊँची जगह पर खड़े होकर बच्चों को आवाज़ दी, "सुनो-सुनो! आज रात मैं तुम सबको अपनी शरारतें दिखाऊँगा!"
बच्चे उत्सुकता से उसकी तरफ देखने लगे। शेर शेर ने अपनी पूंछ को गोल-गोल घुमाया और फिर एक जोरदार दहाड़ मारी। लेकिन यह दहाड़ डराने वाली नहीं, बल्कि हंसाने वाली थी। उसके मुंह से अजीब-अजीब आवाजें निकलने लगीं। बच्चे हंस-हंसकर लोटपोट हो गए।
शेर शेर ने खुशी से कहा, "देखो, मैं जंगल का सबसे मजेदार शेर हूँ!"
बच्चे तालियाँ बजाने लगे और शेर शेर ने सोचा, "यह शहर तो सच में कमाल का है। लेकिन अब मुझे सच में जंगल लौटना होगा।"
क्या शेर शेर सच में जंगल लौट जाएगा या फिर उसे और भी मस्ती करने के मौके मिलेंगे? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
शेर शेर ने देखा कि पास ही एक बड़ा सा पार्क है। वहां बच्चों की भीड़ थी। कुछ बच्चे झूले में झूल रहे थे, तो कुछ गेंद खेल रहे थे। शेर शेर ने सोचा, "यह तो मजेदार जगह है। मुझे भी खेलना चाहिए।"
वह पार्क में गया और देखा कि एक झूला खाली है। उसने झूला देखा और उसके पास पहुंचा। तब तक एक बच्चा वहां आ गया और बोला, "शेर जी, आप झूला झूलेंगे?"
शेर शेर हंसकर बोला, "हाँ, क्यों नहीं! मेरे जैसे राजा को भी तो मस्ती करनी चाहिए।"
शेर शेर झूले पर बैठा और धीरे-धीरे झूलने लगा। लेकिन उसकी भारी काया के कारण झूला तेजी से ऊपर-नीचे होने लगा। बच्चे हंसने लगे और शेर शेर भी हंसते हुए बोला, "अरे, ये तो बड़ा मजेदार है!"
तभी, एक पतंग उड़ाने वाला बच्चा उसके पास आया और बोला, "शेर जी, आप पतंग उड़ाना जानते हैं?"
शेर शेर ने उत्साहित होकर कहा, "नहीं, लेकिन मैं सीख सकता हूँ।"
बच्चे ने उसे पतंग की डोर पकड़ाई और शेर शेर ने पतंग उड़ाने की कोशिश की। पतंग कभी ऊपर जाती, कभी नीचे। बच्चे हंसते हुए बोले, "शेर जी, आप तो बहुत अच्छे पतंगबाज़ बन गए हैं!"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं तो हर काम में अच्छा हूँ।"
शाम हो चुकी थी और शेर शेर ने देखा कि पार्क की लाइट्स जल गईं। उसने सोचा, "अब मुझे सच में जंगल लौटना चाहिए।" लेकिन तभी उसे एक और मस्ती भरा ख्याल आया। उसने पार्क के बीचोबीच एक ऊँची जगह पर खड़े होकर बच्चों को आवाज़ दी, "सुनो-सुनो! आज रात मैं तुम सबको अपनी शरारतें दिखाऊँगा!"
बच्चे उत्सुकता से उसकी तरफ देखने लगे। शेर शेर ने अपनी पूंछ को गोल-गोल घुमाया और फिर एक जोरदार दहाड़ मारी। लेकिन यह दहाड़ डराने वाली नहीं, बल्कि हंसाने वाली थी। उसके मुंह से अजीब-अजीब आवाजें निकलने लगीं। बच्चे हंस-हंसकर लोटपोट हो गए।
शेर शेर ने खुशी से कहा, "देखो, मैं जंगल का सबसे मजेदार शेर हूँ!"
बच्चे तालियाँ बजाने लगे और शेर शेर ने सोचा, "यह शहर तो सच में कमाल का है। लेकिन अब मुझे सच में जंगल लौटना होगा।"
क्या शेर शेर सच में जंगल लौट जाएगा या फिर उसे और भी मस्ती करने के मौके मिलेंगे? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
Chapter
04
दोस्तों की खोज
शेर शेर अपनी मस्तीभरी शाम के बाद जंगल की ओर लौटने की तैयारी कर रहा था। लेकिन उसके मन में अभी भी और ज्यादा मस्ती करने की इच्छा थी। उसने सोचा, "अगर शहर में इतने मजेदार बच्चे हैं, तो उनके दोस्त भी जरूर दिलचस्प होंगे। क्यों न उनकी खोज की जाए?"
शेर शेर ने बच्चों से पूछा, "क्या तुम्हारे दोस्त भी ऐसे ही मजेदार हैं?"
बच्चों में से एक, मीरा, ने चहकते हुए कहा, "हाँ शेर जी, हमारे दोस्त बहुत मजेदार हैं। वे पार्क के दूसरी ओर खेल रहे हैं।"
शेर शेर ने अपनी पूंछ हिलाते हुए कहा, "तो चलो, हम उन्हें भी मिलते हैं!"
बच्चे और शेर शेर पार्क के दूसरी ओर चल पड़े। जैसे ही वे वहाँ पहुँचे, उन्होंने देखा कि बच्चों का एक बड़ा समूह एक पेड़ के नीचे बैठा है। वे सब किसी खेल में व्यस्त थे।
शेर शेर ने अपनी भारी आवाज में कहा, "नमस्ते दोस्तों! मैं शेर शेर हूँ, जंगल का मजेदार शेर।"
बच्चे पहले तो आश्चर्य में पड़ गए, लेकिन फिर खिलखिलाकर हँसने लगे। उनमें से एक, राहुल, ने कहा, "वाह, शेर जी, आपने तो हमें हंसी के गुब्बारे में बदल दिया!"
शेर शेर खुश होकर बोला, "तो क्या तुम लोग मेरे साथ और मस्ती करना चाहोगे?"
सभी बच्चों ने एक साथ कहा, "हाँ!"
तभी शेर शेर ने अपने साथ लाई एक बड़ी सी गेंद निकाली और कहा, "चलो, हम सब मिलकर इसे उछालें!"
बच्चे उछलकर खड़े हो गए और शेर शेर के साथ गेंद को उछालने लगे। गेंद कभी पेड़ से टकराती, कभी ज़मीन पर गिरती। सबकी हंसी गूंजने लगी।
मीरा ने हंसते हुए कहा, "शेर जी, आप तो सच में कमाल के हैं। आपके साथ खेलकर बहुत मजा आ रहा है।"
शेर शेर ने गर्व से कहा, "मैं तो मस्ती का महाराजा हूँ!"
दिन बीतते देर नहीं लगी और सूर्यास्त का समय हो गया। शेर शेर ने आसमान में नारंगी रंग की छटा देखी और कहा, "अब मुझे सच में जंगल लौटना चाहिए।"
राहुल ने कहा, "लेकिन शेर जी, आप फिर आएंगे न?"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "जरूर! मैं जल्द ही लौटूंगा और तब हम और भी मस्ती करेंगे।"
बच्चों ने खुशी-खुशी शेर शेर को अलविदा कहा और शेर शेर ने जंगल की ओर रुख किया। लेकिन उसके मन में एक नई योजना थी। क्या शेर शेर जंगल लौटकर अपने दोस्तों को शहर की मस्ती के बारे में बताएगा? और क्या वे भी उसके साथ शहर आने का फैसला करेंगे?
जानने के लिए पढ़ते रहिए!
शेर शेर ने बच्चों से पूछा, "क्या तुम्हारे दोस्त भी ऐसे ही मजेदार हैं?"
बच्चों में से एक, मीरा, ने चहकते हुए कहा, "हाँ शेर जी, हमारे दोस्त बहुत मजेदार हैं। वे पार्क के दूसरी ओर खेल रहे हैं।"
शेर शेर ने अपनी पूंछ हिलाते हुए कहा, "तो चलो, हम उन्हें भी मिलते हैं!"
बच्चे और शेर शेर पार्क के दूसरी ओर चल पड़े। जैसे ही वे वहाँ पहुँचे, उन्होंने देखा कि बच्चों का एक बड़ा समूह एक पेड़ के नीचे बैठा है। वे सब किसी खेल में व्यस्त थे।
शेर शेर ने अपनी भारी आवाज में कहा, "नमस्ते दोस्तों! मैं शेर शेर हूँ, जंगल का मजेदार शेर।"
बच्चे पहले तो आश्चर्य में पड़ गए, लेकिन फिर खिलखिलाकर हँसने लगे। उनमें से एक, राहुल, ने कहा, "वाह, शेर जी, आपने तो हमें हंसी के गुब्बारे में बदल दिया!"
शेर शेर खुश होकर बोला, "तो क्या तुम लोग मेरे साथ और मस्ती करना चाहोगे?"
सभी बच्चों ने एक साथ कहा, "हाँ!"
तभी शेर शेर ने अपने साथ लाई एक बड़ी सी गेंद निकाली और कहा, "चलो, हम सब मिलकर इसे उछालें!"
बच्चे उछलकर खड़े हो गए और शेर शेर के साथ गेंद को उछालने लगे। गेंद कभी पेड़ से टकराती, कभी ज़मीन पर गिरती। सबकी हंसी गूंजने लगी।
मीरा ने हंसते हुए कहा, "शेर जी, आप तो सच में कमाल के हैं। आपके साथ खेलकर बहुत मजा आ रहा है।"
शेर शेर ने गर्व से कहा, "मैं तो मस्ती का महाराजा हूँ!"
दिन बीतते देर नहीं लगी और सूर्यास्त का समय हो गया। शेर शेर ने आसमान में नारंगी रंग की छटा देखी और कहा, "अब मुझे सच में जंगल लौटना चाहिए।"
राहुल ने कहा, "लेकिन शेर जी, आप फिर आएंगे न?"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "जरूर! मैं जल्द ही लौटूंगा और तब हम और भी मस्ती करेंगे।"
बच्चों ने खुशी-खुशी शेर शेर को अलविदा कहा और शेर शेर ने जंगल की ओर रुख किया। लेकिन उसके मन में एक नई योजना थी। क्या शेर शेर जंगल लौटकर अपने दोस्तों को शहर की मस्ती के बारे में बताएगा? और क्या वे भी उसके साथ शहर आने का फैसला करेंगे?
जानने के लिए पढ़ते रहिए!
Chapter
05
जंगल की वापसी
शेर शेर जंगल की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसे अपने दोस्तों की याद आने लगी। उसने सोचा, "मैंने शहर में जो मजेदार समय बिताया, वो सबको बताना चाहिए। वे भी तो मस्ती करना चाहेंगे।"
जब शेर शेर जंगल पहुंचा, तो वहां उसके सभी दोस्त इंतजार कर रहे थे। हाथी, बन्दर, खरगोश, और तोता सबने उसे घेर लिया।
हाथी ने उत्सुकता से पूछा, "शेर भाई, शहर में कैसा रहा?"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "अरे, वहां तो बहुत मजा आया! बच्चे मेरे साथ खेलते, हँसते और मस्ती करते रहे।"
बन्दर ने चहकते हुए कहा, "वाह! हमें भी शहर ले चलो न। हम भी मस्ती करना चाहते हैं।"
शेर शेर ने सोचा और बोला, "अगर तुम सब तैयार हो, तो हम सब मिलकर अगले हफ्ते शहर चलेंगे।"
सभी जानवर खुशी से उछल पड़े। खरगोश ने कहा, "लेकिन हमारे पास तो बहुत सारे काम होते हैं। जंगल की देखभाल कौन करेगा?"
शेर शेर ने समझाया, "हम बारी-बारी से जाएंगे, ताकि कोई भी काम अधूरा न रहे।"
तोता ने खुशी से कहा, "याय! तो तय रहा कि हम भी शहर की मस्ती का मजा लेंगे।"
अगले दिन से जानवरों ने अपनी तैयारियाँ शुरू कर दीं। कोई टोपी बना रहा था तो कोई रंगीन कपड़े। सबने तय किया कि वे शहर में जाकर बच्चों को अपनी कलाओं से चौंका देंगे।
शेर शेर ने सबको कहा, "हमें अपनी हरकतों से शहरवालों को हंसाना है। हमें यह दिखाना है कि जंगल के जानवर भी बहुत मजेदार होते हैं।"
सभी जानवरों ने एक सुर में कहा, "हाँ! हम जरूर करेंगे!"
जब सबकी तैयारी पूरी हो गई, तो शेर शेर ने कहा, "अगले हफ्ते हम सभी शहर चलेंगे। और तब तक, हम अपनी कलाओं का अभ्यास करेंगे।"
सभी जानवरों ने अपने-अपने काम में लग गए। जंगल में खुशियों की लहर दौड़ गई। सबको इंतजार था उस दिन का जब वे शहर जाकर अपनी मस्ती का जादू बिखेरेंगे।
लेकिन क्या जंगल के जानवर शहर की मस्ती में खो जाएंगे? क्या शेर शेर और उसके दोस्त शहर में कुछ नया सीख पाएंगे? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
जब शेर शेर जंगल पहुंचा, तो वहां उसके सभी दोस्त इंतजार कर रहे थे। हाथी, बन्दर, खरगोश, और तोता सबने उसे घेर लिया।
हाथी ने उत्सुकता से पूछा, "शेर भाई, शहर में कैसा रहा?"
शेर शेर ने मुस्कुराते हुए कहा, "अरे, वहां तो बहुत मजा आया! बच्चे मेरे साथ खेलते, हँसते और मस्ती करते रहे।"
बन्दर ने चहकते हुए कहा, "वाह! हमें भी शहर ले चलो न। हम भी मस्ती करना चाहते हैं।"
शेर शेर ने सोचा और बोला, "अगर तुम सब तैयार हो, तो हम सब मिलकर अगले हफ्ते शहर चलेंगे।"
सभी जानवर खुशी से उछल पड़े। खरगोश ने कहा, "लेकिन हमारे पास तो बहुत सारे काम होते हैं। जंगल की देखभाल कौन करेगा?"
शेर शेर ने समझाया, "हम बारी-बारी से जाएंगे, ताकि कोई भी काम अधूरा न रहे।"
तोता ने खुशी से कहा, "याय! तो तय रहा कि हम भी शहर की मस्ती का मजा लेंगे।"
अगले दिन से जानवरों ने अपनी तैयारियाँ शुरू कर दीं। कोई टोपी बना रहा था तो कोई रंगीन कपड़े। सबने तय किया कि वे शहर में जाकर बच्चों को अपनी कलाओं से चौंका देंगे।
शेर शेर ने सबको कहा, "हमें अपनी हरकतों से शहरवालों को हंसाना है। हमें यह दिखाना है कि जंगल के जानवर भी बहुत मजेदार होते हैं।"
सभी जानवरों ने एक सुर में कहा, "हाँ! हम जरूर करेंगे!"
जब सबकी तैयारी पूरी हो गई, तो शेर शेर ने कहा, "अगले हफ्ते हम सभी शहर चलेंगे। और तब तक, हम अपनी कलाओं का अभ्यास करेंगे।"
सभी जानवरों ने अपने-अपने काम में लग गए। जंगल में खुशियों की लहर दौड़ गई। सबको इंतजार था उस दिन का जब वे शहर जाकर अपनी मस्ती का जादू बिखेरेंगे।
लेकिन क्या जंगल के जानवर शहर की मस्ती में खो जाएंगे? क्या शेर शेर और उसके दोस्त शहर में कुछ नया सीख पाएंगे? जानने के लिए पढ़ते रहिए!
Cast of Characters
K
Karan
AntagonistSik
Reader Comments
5 readers
Sign in or create an account to leave a comment.
No comments yet. Be the first to share your thoughts!
The End
जंगल का राजा शेर शेर
by ran singh
21 words · 5 chapters · 1 characters
Made with StoryMaker