Vishanu bhiya ka liya comady love story

Vishanu bhiya ka liya comady love story

by

Ansh sharma

Comedy Kids

विष्णु भैया, एक नन्हा और मजेदार विषाणु, शहर में आते हैं और हंसी-खुशी की लहर फैलाते हैं। उनकी कहानी में हंसी और प्यार का अनोखा संगम होता है।

Chapter

01

विष्णु भैया का आगमन

Chapter 1, Scene 1

Chapter 1 · Scene 1

विष्णु भैया, एक नन्हे से विषाणु, हवा के झोंके के साथ शहर में आ पहुँचे। वह इतने छोटे थे कि कोई उन्हें देख भी नहीं सकता था। उनके पास एक खास बात थी - वह हर बात पर हंसते थे और दूसरों को भी हंसा देते थे।

Chapter 1, Scene 2

Chapter 1 · Scene 2

जब वह शहर में आए, तो पहले उन्होंने सोचा, "यहाँ बहुत मज़ा आएगा। मैं सबको हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दूंगा।" उन्होंने अपने छोटे-छोटे पैरों से एक कार की छत पर छलांग लगाई और शहर की सैर शुरू कर दी।

Chapter 1, Scene 3

Chapter 1 · Scene 3

शहर में सभी लोग अपनी-अपनी धुन में लगे थे। कोई काम पर जा रहा था, तो कोई स्कूल। विष्णु भैया ने देखा कि लोग बहुत गंभीर दिख रहे थे। उन्होंने सोचा, "अरे! यहाँ तो सबको हंसी की बहुत जरूरत है।"

Chapter 1, Scene 4

Chapter 1 · Scene 4

विष्णु भैया ने सबसे पहले एक छोटे बच्चे को देखा, जो फुटपाथ पर अपने गुब्बारे के साथ खेल रहा था। विष्णु भैया ने धीरे से उसकी नाक पर छू लिया। बच्चा अचानक छींकने लगा, और उसकी छींक के साथ गुब्बारा ऊपर उड़ गया। बच्चा पहले तो चौंका, फिर जोर से हंसने लगा।

Chapter 1, Scene 5

Chapter 1 · Scene 5

शाम होते-होते, विष्णु भैया ने पूरे शहर को अपनी हंसी से गुदगुदा दिया था। लोग आश्चर्यचकित थे, "अरे, ये क्या हो रहा है?" लेकिन उन्हें यह भी महसूस हो रहा था कि उनका दिन कितना अच्छा गुजरा।

Chapter

02

शहर की मस्ती

अगली सुबह, सूरज की पहली किरणों के साथ ही, विष्णु भैया ने अपनी आँखें खोलीं। पेड़ की पत्ती पर आराम करते हुए उन्होंने देखा कि शहर में एक नई हलचल हो रही है। लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे, और बच्चे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे।

विष्णु भैया ने सोचा, "आज कौन सी नई मस्ती की जाए?" तभी उनकी नज़र एक स्कूल बस पर पड़ी, जो बच्चों से भरी हुई थी। बस में बच्चों की खुसफुसाहट और हंसी की आवाज़ गूँज रही थी। विष्णु भैया ने बस के पास जाकर धीरे से कहा, "चलो, आज स्कूल की मस्ती करते हैं।"

बस जैसे ही स्कूल पहुँची, विष्णु भैया ने बच्चों के बीच अपनी हंसी की लहर फैलानी शुरू कर दी। उन्होंने गुपचुप बच्चों के कानों में फुसफुसाया, "हँसों, हँसों!" और अचानक ही बच्चों की क्लास में हंसी का फव्वारा फूट पड़ा। शिक्षक भी हैरान होकर देखने लगे कि आखिर हो क्या रहा है।

शिक्षक ने बच्चों से पूछा, "बच्चों, क्या बात है? इतनी हंसी क्यों आ रही है?" एक बच्चा बोला, "पता नहीं सर, पर कुछ तो मजेदार है!" यह सुनकर शिक्षक भी मुस्कुरा दिए।

विष्णु भैया ने देखा कि उनकी शरारत से सब खुश हैं। उन्होंने सोचा, "वाह! स्कूल की मस्ती तो और भी मजेदार है।"

पर तभी, विष्णु भैया की नजर स्कूल के प्रिंसिपल पर पड़ी। वे गम्भीर दिख रहे थे और सोच रहे थे कि आखिर यह हंसी का माजरा क्या है। उन्होंने स्कूल के सभी बच्चों को इकट्ठा किया और कहा, "बच्चों, हमें मिलकर यह पता लगाना है कि यह हंसी का कारण क्या है।"

विष्णु भैया ने सोचा कि कहीं उनकी मस्ती का भांडा न फूट जाए। उन्होंने जल्दी से स्कूल छोड़ने की सोची। लेकिन तभी उन्होंने सुना कि प्रिंसिपल बच्चों को एक कहानी सुनाने वाले हैं। विष्णु भैया ने सोचा, "चलो, यह कहानी सुनते हैं, फिर आगे की मस्ती सोचेंगे।"

प्रिंसिपल कहानी सुनाने लगे और बच्चे ध्यान से सुनने लगे। विष्णु भैया भी कहानी में खो गए। कहानी खत्म होने पर प्रिंसिपल ने कहा, "देखो बच्चों, हंसी और खुशी हमारी जिंदगी का हिस्सा होनी चाहिए, लेकिन हमें पढ़ाई भी करनी चाहिए।"

विष्णु भैया ने सोचा, "यह तो सही कहा। हंसी-खुशी के साथ-साथ पढ़ाई भी जरूरी है।" और उन्होंने मन बना लिया कि अब वे बच्चों की मदद करेंगे पढ़ाई में भी मजा लाने के लिए।

अब विष्णु भैया की मस्ती को एक नई दिशा मिल गई थी। उन्होंने सोचा, "कल से पढ़ाई में भी मस्ती करेंगे। देखते हैं, क्या नया कारनामा होगा।"

और इसी सोच के साथ विष्णु भैया ने स्कूल को अलविदा कहा, यह सोचते हुए कि कल का दिन और भी मजेदार होगा। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि अगले दिन उन्हें एक नया दोस्त मिलेगा, जो उनकी मस्ती में उनका साथी बनेगा।

Chapter

03

विष्णु भैया को प्यार हुआ

अगले दिन सुबह-सुबह, विष्णु भैया ने स्कूल की ओर रुख किया। आज उनके मन में नई मस्ती का ख्याल था। स्कूल के गेट पर पहुंचते ही उन्हें बच्चों की हंसी सुनाई दी। वे सोचने लगे, "यह बच्चों की हंसी किस बात पर है?"

जैसे ही विष्णु भैया क्लासरूम में दाखिल हुए, उन्होंने देखा कि बच्चे एक नए दोस्त से मिल रहे थे। वह एक प्यारी सी परी थी, जिसका नाम था परीना। उसकी मुस्कान इतनी चमकदार थी कि हर कोई उसकी ओर खिंच जाता। विष्णु भैया को भी परीना का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक लगा।

परीना ने बच्चों से कहा, "मैं यहाँ आई हूँ तुम्हारी पढ़ाई में मदद करने के लिए। लेकिन मेरा तरीका थोड़ा अलग है। हम खेल-खेल में पढ़ाई करेंगे।"

विष्णु भैया ने सोचा, "वाह! यह तो बिलकुल मेरे मन की बात कह दी।" उन्होंने परीना के पास जाकर धीरे से पूछा, "क्या मैं भी तुम्हारी मदद कर सकता हूँ?"

परीना ने मुस्कुराते हुए कहा, "बिल्कुल! हम मिलकर बच्चों को पढ़ाई में मजा दिलाएंगे।"

फिर क्या था, विष्णु भैया और परीना ने मिलकर बच्चों के लिए एक मजेदार खेल तैयार किया। वे बच्चों को गणित के सवाल खेल-खेल में सिखाने लगे। वे पहेलियाँ पूछते और बच्चे उन्हें हल करते।

विष्णु भैया ने सभी बच्चों से कहा, "आज हम हंसी-खुशी के साथ-साथ ज्ञान भी बढ़ाएंगे।"

बच्चों ने इस नए तरीके से पढ़ाई करने का खूब आनंद लिया। वे हंसते-खेलते पढ़ाई कर रहे थे और विष्णु भैया और परीना की जोड़ी ने उनके दिल जीत लिए थे।

जैसे ही स्कूल की घंटी बजी, बच्चे अपने घरों की ओर चल दिए। लेकिन विष्णु भैया और परीना को देख कर वे बोले, "आप दोनों कल भी आएंगे ना?"

विष्णु भैया ने हंसते हुए कहा, "हां, हम कल फिर आएंगे। और कुछ नया और मजेदार खेल भी लाएंगे।"

परीना ने कहा, "बिलकुल! हम मिलकर पढ़ाई को मजेदार बनाएंगे।"

विष्णु भैया और परीना ने स्कूल को अलविदा कहा और बच्चों को वादा किया कि वे उनके लिए और भी मजेदार दिन लाएंगे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि कल एक बड़ा सरप्राइज उनका इंतजार कर रहा था।

Chapter

04

हंसी का जीत

अगले दिन, सुबह की सुनहरी धूप खिली हुई थी। विद्यालय के गेट पर बच्चों की भीड़ थी। हर कोई उत्सुक था कि आज विष्णु भैया और परीना क्या नया खेल लाएंगे।

जैसे ही विष्णु भैया और परीना स्कूल के प्रांगण में पहुंचे, बच्चों ने तालियों से उनका स्वागत किया। परीना ने मुस्कुराते हुए कहा, "बच्चों, आज हम एक नया खेल खेलेंगे जिसका नाम है 'हंसी का जीत'।"

विष्णु भैया ने अपने छोटे-छोटे हाथों से एक रंगीन गेंद निकाली और बोले, "यह हंसी की गेंद है। इसे पास करते वक्त जो भी मजेदार चुटकुला सुनाएगा, वही जीत जाएगा।"

बच्चे खुशी से उछल पड़े। खेल शुरू हुआ। पहली गेंद परीना ने रिया को पास की। रिया ने मजेदार चुटकुला सुनाया, "एक बार एक मछली ने दूसरी मछली से कहा, 'तुम्हारा नाम क्या है?' दूसरी मछली बोली, 'जलपरी।' पहली मछली बोली, 'अरे! पर तुम तो मछली हो।' दूसरी मछली ने कहा, 'हाँ, लेकिन मेरे पापा जी को पानी में रहना पसंद नहीं।'"

सब हँसने लगे। गेंद फिर से पास की गई। हर बच्चा अपने-अपने चुटकुले सुनाने लगा। खेल के दौरान हर कोई खिलखिलाता रहा।

तभी, विद्यालय के प्रधानाचार्य, श्रीमान शर्मा, वहाँ आए। उन्होंने बच्चों की हंसी सुनी और वहाँ आकर पूछा, "यहाँ क्या चल रहा है?"

परीना ने कहा, "हम हंसी का खेल खेल रहे हैं, सर। यह बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।"

श्रीमान शर्मा ने हंसते हुए कहा, "बहुत अच्छा! मैं भी एक चुटकुला सुनाना चाहता हूँ।"

बच्चे चौंक गए। प्रधानाचार्य का चुटकुला सुनने का मौका कौन छोड़ता?

श्रीमान शर्मा ने कहा, "एक बार एक बकरी ने दूसरी बकरी से कहा, 'तुम्हें पता है मैं कौन हूँ?' दूसरी बकरी ने कहा, 'नहीं।' पहली बकरी बोली, 'मैं बकरी हूँ, लेकिन मेरी ना कोई पहचान पत्र है ना कोई आधार कार्ड।'"

सब हँसते-हँसते लोटपोट हो गए।

खेल के अंत में, विष्णु भैया ने कहा, "इस खेल ने हमें सिखाया कि हंसी सबसे बड़ी दवा है। जब हम हँसते हैं, तो हम खुश रहते हैं और साथ ही साथ हमारे दोस्त भी खुश रहते हैं।"

परीना ने सभी बच्चों को धन्यवाद दिया और कहा, "कल हम और भी मजेदार खेल खेलेंगे। लेकिन तुम्हें यहाँ पर एक और सरप्राइज भी मिलेगा।"

बच्चे उत्सुकता से पूछने लगे, "क्या सरप्राइज है?"

लेकिन परीना ने रहस्यमय मुस्कान के साथ कहा, "यह कल ही पता चलेगा।"

बच्चों की आँखों में उत्सुकता और चेहरे पर मुस्कान थी। वे जानते थे कि कल का दिन और भी मजेदार होने वाला है।

Cast of Characters

Vishnu bhiya

Vishnu bhiya

Protagonist

एक बार की बात है, एक छोटा सा विषाणु (Virus) था। वह इतना छोटा था कि किसी को दिखाई भी नहीं देता था। एक दिन वह हवा के साथ एक शहर में पहुँच गया। धीरे-धीरे वह लोगों के शरीर में घुसने लगा। शुरू में किसी को पता नहीं चला, लेकिन कुछ दिनों बाद लोग बीमार होने लगे। अस्पताल भरने लगे और शहर में डर फैल गया। लेकिन फिर डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने मिलकर मेहनत की। उन्होंने दवा और वैक्सीन बना

Reader Comments

3 readers

Sign in or create an account to leave a comment.

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

The End

Vishanu bhiya ka liya comady love story

by Ansh sharma

34 words · 4 chapters · 1 characters

Made with StoryMaker